संसार का सबसे बड़ा सच मौत है। जो पैदा हुआ है उसे एक न एक दिन मरना ही है। सभी मौत से डरते हैं। हर किसी की यह इच्छा होती है कि उसे उसकी भावी मौत की सूचना प्राप्त हो जाए। कई बार हमारे शरीर के अंग भी मौत की पूर्व सूचना दे देते हैं। हमारे शास्त्र भी इसका प्रमाण देते हैं।
1. यदि अचानक शरीर सब ओर से सफेद या पीला पड़ जाए और ऊपर से कुछ लाल दिखे तो उस मनुष्य की मौत छह महीने में ही हो जाती है।
2. जब आंखें सूर्य चंद्रमा या अग्रि का प्रकाश देखना बंद कर दें या उन्हें सब कुछ काला ही दिखे तो भी मनुष्य सिर्फ छह महीने ही जीवित रहता है।
3. जब शरीर के सभी अंगों में अंगड़ाई आने लगे या तालु सूख जाए तब मनुष्य एक महीने ही जीवित रहता है।
4. त्रिदोष में जिसकी नाक बहने लगे उसका जीवन पंद्रह दिन से अधिक नहीं रहता।
5. जब मनुष्य अपनी छाया को सिर रहित या अपने आपको ही छाया रहित पाए तो वह एक महीने भी जीवित नहीं रहता।
6. जिसकी जीभ फूल जाए या दांतों से मवाद निकलने लगे तो उसकी भी छह महीने के भीतर ही मौत हो जाती है।
मौत की भविष्यवाणी भी करते हैं सपनें
मौत ऐसी सच्चाई है जिसके बारे में सभी जानते हैं लेकिन फिर भी उससे अनभिज्ञ बने रहते हैं। भविष्य में घटने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं के तरह सपने मौत की भविष्यवाणी भी करते हैं। आवश्यकता है उनका आशय समझने की। स्वप्न ज्योतिष में ऐसे स्वप्नों की जानकारी दी गई है।
1- जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को शमशान अथवा पर्वत के शिखर पर बैठकर मदिरापान करता देखता है वह शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त होता है।
2- स्वप्न में जो स्वयं को स्याही अथवा तेल शरीर पर लगाकर गधे की सवारी करता देखता है, उसकी निश्चित रूप से मृत्यु हो जाती है।
3- जो व्यक्ति लगातार भयानक सपने देखता है, उसके प्राण एक वर्ष के भीतर यमराज हर कर ले जाते हैं।
4- यदि कोई स्त्री स्वप्न में स्वयं के सफेद बाल देखती है तो उसका पति से विछोह हो जाता है या उसके पति की मृत्यु हो जाती है।
5- यदि स्वप्न में आप स्वयं को यात्रा पर जाे हुए देंखे तो यात्रा टाल दें क्योंकि यात्रा में आपकी मृत्यु हो सकती है।
6- यदि सपने में शरीर का कोई अंग कटा हुआ देंखे तो निकट भविष्य में किसी परिजन की मृत्यु अवश्यासंभी है।
7- जो व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को हंसता या नाचता हुआ देखता है उसकी हत्या हो जाती है।
8- जो व्यक्ति स्वप्न में कौआ देखता है उसे शीघ्र ही किसी की मृत्यु का समाचार मिलता है।
9- यदि कोई स्वयं को स्वप्न में काले कपड़े पहनकर, काले घोड़े पर सवार होकर देखता है तो किसी रोग के कारण शीघ्र ही उसकी मृत्यु हो जाती है।
10- जो व्यक्ति अपने इष्ट देवी की प्रतिमा को फूटते हुए या जलते हुए देखता है उसकी कुछ ही दिनों में मृत्यु हो जाती है।
11- यदि कोई लाल साड़ी पहनी हुई स्त्री स्वप्न में आलिंगन करे व सूखे फूलों की माला पहनाए तो उसकी मृत्यु शीघ्र ही हो जाती है।
12- जो व्यक्ति स्वप्न में स्त्री का स्तनपान करता है, उसकी मृत्यु निश्चित है।
13- यदि कोई लंबे नाखून, पीली आंख नाली निर्वस्त्र स्त्री स्वप्न में आलिंगन करे तो भी मृत्यु हो जाती है।
14- स्वप्न में यदि कोई स्वयं को पेड़ से गिरता हुआ देखता है तो रोग जनित होकर उसकी मृत्यु हो जाती है।
15- यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में नगाड़े बते हुए स्वयं का मुंजाडन करवाता है तो शीघ्र ही उसके परिवार में किसी वृद्ध की मौत हो जाती है।
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हिंदू धर्म में कई शकुन-अपशकुन की मान्यताएं हैं। कुछ शकुन-अपशकुन जीव-जंतुओं से भी जुड़े हैं। ऐसा माना जाता है भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में जीव-जंतुओं को पूर्व में पता चल जाता है। कुत्ता एक ऐसा प्राणी है जो मनुष्यों के सबसे निकट है। ऐसी जनश्रुति है कि कुत्तों को प्रेत, आत्मा तथा यमदूत दिखाई देते हैं। शकुन शास्त्र में कुत्ते को शकुन रत्न कहा गया है। कुत्ते से जुड़े कुछ शकुन-अपशकुन इस प्रकार हैं-
1- यदि कुत्ता किसी बीमार व्यक्ति के हाथ को चाटता है तो वह एक सप्ताह के भीतर मर जाता है। यदि कुत्ता रोगी के मुख व नाक को चाटे तो रोगी की दस दिन में मृत्यु हो जाती है। और यदि कुत्ता रोगी के पास आकर सो जाए और उसके मुंह से लार टपके तो रोगी की मृत्यु उसी दिन हो जाती है।
2- यात्रा पर निकलते समय किसी व्यक्ति को कुत्ता अपने मुख में रोटी, पुड़ी या अन्य कोई खाद्य वस्तु खाता दिखे तो उसे धन का लाभ होता है।
3- जिस कुत्ते की पुंछ या कान कटे हो। अगर ऐसा कुत्ता किसी यात्री के समाने आ जाए तो कार्य में असफलता मिलती है।
4- यदि कुत्ता किसी के घर में बार-बार दीवार कुरेदता है तो उस घर में निश्चित रूप से चोरी होती है।
5- यात्रा पर निकलते समय यदि कुत्ता पीछे से आकर रोता है तो यात्री की मृत्यु हो सकती है।
6- यदि कुत्ता आकर किसी के पैरों को सूंघता है तो उसे शीघ्र ही यात्रा पर जाना पड़ता है।
7- कुत्ता यदि अपनी जीभ से अपने दाहिने अंग को चाटता है या खुजाता है तो ये कार्य सिद्धि की सूचना है।
8- यात्रा पर निकलते समय यदि कुत्ता जूते लेकर भाग जाए या किसी के जूते लेकर आगे आ जाए तो निश्चित रूप से धन हानि होती है।
9- किसी रोगी के समीप कुत्ता आकर अपनी पूंछ बार-बार चाटे या सूंघे तो रोगी की दो-तीन दिन में मृत्यु हो जाती है।
10- यदि कोई कुत्ता जाते हुए व्यक्ति के साथ बाईं ओर चलता है तो उसे सुंदर स्त्री व धन मिलता है। यदि दाहिनी ओर चले तो चोरी से धन हानि की सूचना देता है।
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Many craftsmen left Delhi and went to the courts of Rajasthan and Punjab in search of work. With the 18th and 19th century bringing industrialization, the craft suffered another setback.It was only after receiving independencein the year 1947 that the Indian government undertook steps to promote Zari embroidery.
Method of Zardozi Embroidery
The process of doing Zardozi embroidery starts with the craftsmen sitting cross-legged around the Addaa, the wooden framework, with their tools. The tools include curved hooks, needles, salmaa pieces (gold wires), sitaaras (metal stars), round-sequins, glass & plastic beads, dabkaa (thread) and kasab (thread). The second step in the process is to trace out the design on the cloth, if possible fabrics like silk, satin, velvet, etc. The fabric is then stretched over the wooden frame and the embroidery work begins. Needle is used to pull out each zardozi element and then, it is integrated into the basic design by pushing the needle into the fabric.
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तत्काल वे किसी बच्चे कि तरह स्वभाविक रूप से गहरी और बाधारहित नींद में सो जाते थे| चार या कई बार पांच घंटों के बाद जब वे जागते थे तो वे पूरी तरह तरोताज़ा होते थे और अपने काम पर लौटने को उत्सुक रहते थे|
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मुँशी शालिग्राम बनारस के पुराने रईस थे। जीवन-वृति वकालत थी और पैतृक सम्पत्ति भीअधिक थी। दशाश्वमेध घाट पर उनका वैभवान्वित गृह आकाश को स्पर्श करता था। उदार ऐसे कि पचीस-तीस हजार की वाषिर्क आय भी व्यय को पूरी न होती थी। साधु-ब्राहमणों के बड़े श्रद्वावान थे। वे जो कुछ कमाते, वह स्वयं ब्रह्रमभोज और साधुओं के भंडारे एवं सत्यकार्य में व्यय हो जाता। नगर में कोई साधु-महात्मा आ जाये, वह मुंशी जी का अतिथि।संस्कृत के ऐसे विद्वान कि बड़े-बड़े पंडित उनका लोहा मानते थे वेदान्तीय सिद्वान्तों के वे अनुयायी थे। उनके चित्त की प्रवृति वैराग्य की ओर थी।
मुंशी प्रेमचन्द
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एक सर्वेक्षण के दौरान जब पूछा गया कि क्या आप अपने कर्मचारियों के परिवार वालो, माता पिता या भतीजी-भांजियों की यहां तो बात ही नहीं है, उनकी पत्नी और उनके बच्चो के बारे में कुछ जानते है,यानि उनसे परिचय है, तो प्रत्येक १०० वरिष्ठ प्रबंधकों में से ९८ ने 'नही' में जवाब दिया|
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